कॉर्पोरेट जंग : अडानी और अंबानी ग्रुप भी भिड़ेंगे, देख लेना !

डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी, इंदौर
आनेवाले कुछ समय में अडानी और अंबानी समूह के कारोबारी हितों का टकराव तय है। आज हर क्षेत्र में सीधी टक्कर नहीं है, लेकिन दोनों एक-दूसरे के इलाके में घुस रहे हैं। जहाँ विस्तार एक साथ हो रहा है, वहाँ प्रतिस्पर्धा तेज होगी। लड़ाई दुकान की नहीं है। लड़ाई इस बात की है कि कल की बिजली कौन बनाएगा, डेटा सेंटर कौन चलाएगा, और हवाई अड्डे पर नेटवर्क किस शर्त पर चलेगा। रिलायंस की पकड़ उपभोक्ता बाजार में मजबूत है। अडानी की पकड़ इंफ्रास्ट्रक्चर में।

रिलायंस का पुराना आधार तेल और पेट्रोकेमिकल्स है। उसी समूह का जियो मोबाइल सेक्टर में है और रिलायंस रिटेल किराना से लेकर मॉल तक फैला है। FY2024-25 में रिलायंस रिटेल का सकल कारोबार 3,30,870 करोड़ रुपये रहा। 31 मार्च 2025 को उसके 19,340 स्टोर थे। जियो के मोबाइल उपभोक्ता मार्च 2025 के अंत में करीब 47 करोड़ थे। अब वही समूह सौर ऊर्जा, बैटरी और ग्रीन पावर से डेटा सेंटर चलाने की तैयारी कर रहा है।

अडानी का मजबूत आधार ऊर्जा, बंदरगाह, लॉजिस्टिक्स, एयरपोर्ट, सीमेंट और ट्रांसमिशन में है। आवास में वह बड़े खिलाड़ियों में है।अडानी ग्रीन एजर्जी की परिचालन नवीकरणीय क्षमता FY2024-25 के अंत में 14,243 मेगावॉट यानी 14.2 गीगावॉट थी। कच्छ के खवड़ा में सौर और पवन का विस्तार नक्शा बदलने जितना बड़ा है। समूह का लक्ष्य 2030 तक नवीकरणीय क्षमता 50 गीगावॉट करने का है। यानी चार साल में तीन गुना से ज्यादा का लक्ष्य है।

नया मोर्चा डेटा सेंटर है। अडानीकनेक्स की शुरुआती योजना 1 गीगावॉट की थी। बाद में समूह ने इसे बहु-गीगावॉट रोडमैप तक बढ़ाया है, और 2035 तक अक्षय ऊर्जा से चलने वाले एआई डेटा सेंटरों में बड़े निवेश की बात कही है। रिलायंस अपने डिजिटल नेटवर्क, क्लाउड और एआई क्षमता के साथ इसी मैदान में उतरा है। सवाल अब सिर्फ तेल का नहीं रहा। सवाल यह भी है कि आगे बड़ा कौन होगा, ऊर्जा वाला या डेटा वाला।

मीडिया में भी दोनों मौजूद हैं। रिलायंस का जिओस्टार और नेटवर्क18 उपभोक्ता तक पहुँच रखते हैं। अडानी के पोर्टफोलियो में एनडीटीवी है। यह अभी खुली लड़ाई नहीं है, पर दोनों के पास आवाज का मंच है।

आम आदमी के लिए सवाल सीधा है। सस्ती बिजली और बेहतर सेवा आएगी, या सिर्फ दो और बड़े होंगे?

असली कहानी ऊर्जा, डिजिटल इंफ्रा, उपभोक्ता बाजार और मीडिया में बदलती कारोबारी संरचना की है। जिन क्षेत्रों में दोनों का विस्तार हो रहा है, वहाँ आने वाले वर्षों में टकराव अधिक साफ दिखाई देगा।

आपको क्या लगता है, यह मुकाबला देश के लिए अच्छा है ?

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