जन्मदिन मना रही हैं आज राजमाता शिवगामी देवी

रम्या कृष्णन

प्रीति सिंह, गाजियाबाद, उत्तरप्रदेश

आज भले ही पूरी लोग उन्हें बाहुबली की राजमाता शिवगामी देवी के किरदार से जानते है लेकिन रम्या कृष्णन 90 के दशक से ही बॉलीवुड में काम कर रही है।
जब लोगों ने बाहुबली में उनका दमदार अभिनय देखा, तो कई लोगों को लगा कि वो कोई नया चेहरा हैं। लेकिन सच तो ये है कि वे सालों से हिंदी फिल्मों का हिस्सा रही हैं।

रम्या कृष्णन का जन्म 15 सितंबर 1970 को चेन्नई में हुआ था। उनके घर में कला का माहौल पहले से था, वे प्रसिद्ध तमिल अभिनेता और व्यंग्यकार चो रामास्वामी की भतीजी हैं। उन्होंने बचपन से ही भरतनाट्यम और कुचीपुड़ी नृत्य की पेशेवर ट्रेनिंग ली थी।

उनकी फिल्मों में एंट्री की कहानी बेहद दिलचस्प है..

रम्या कृष्णन ने फिल्मों में काम करना बहुत छोटी उम्र में ही शुरू कर दिया था। जब वो सिर्फ 13-14 साल की थीं, तब उन्होंने अपनी पहली मलयालम फिल्म Neram Pularumbol की शूटिंग की थी। लेकिन इस फिल्म को रिलीज होने में काफी समय लग गया।
इसी वजह से थियेटर में रिलीज होने वाली उनकी तमिल फिल्म Vellai Manasu ही उनकी पहली डेब्यू फिल्म बनी।
इस फिल्म में वह वाई. जी. महेंद्रन के अपोजिट नजर आईं।

यहीं से उनके उस शानदार फ़िल्मी सफर की शुरुआत हुई, जिसने उन्हें आगे चलकर सिनेमा की राजमाता बना दिया।

90 के दशक में रम्या कृष्णन साउथ सिनेमा की टॉप अभिनेत्रियों में शुमार हो चुकी थीं, लेकिन उन्हें एक अलग कल्ट स्टेटस दिलाया भक्ति फिल्मों ने।

साल 1995 में आई एक तेलुगु फिल्म अम्मारु में रम्या ने देवी मां का किरदार निभाया था।
इस फिल्म के बाद साउथ के गांवों और शहरों में लोग रम्या कृष्णन को साधारण महिला नहीं, बल्कि साक्षात देवी का रूप मानने लगे थे

आलम ये था कि जब भी वो किसी मंदिर या सार्वजनिक कार्यक्रम में जाती थीं, तो महिलाएं और बुजुर्ग अपनी मन्नतें लेकर उनके पैरों में गिर जाते थे और उनसे आशीर्वाद मांगते थे।
रम्या ने इसके बाद कई फिल्मों जैसे राजकाली अम्मन और श्री राजा राजेश्वरी में भी देवी के किरदार निभाए।

रम्या कृष्णन 90 के दशक में इतनी बड़ी स्टार बन चुकी थीं कि उन्होंने एक फिल्म में थलाइवा रजनीकांत के भी पसीने छुड़ा दिए थे।

साल 1999 में उन्होंने डायरेक्टर के.एस. रविकुमार की फिल्म पदयप्पा साइन की थी। इस फिल्म में उन्होंने नीलांबरी नाम की विलेन का रोल किया. जिसे पदयप्पा से प्यार हो जाता है, लेकिन रिजेक्शन मिलने पर वो अपनी आखिरी सांस तक बदला लेने की कसम खाती है।

रम्या ने विलेन के इस रोल को इतनी शिद्दत से निभाया था कि थिएटर में रजनीकांत के फैंस नाराज हो गए थे। कई कट्टर फैंस इस बात से भड़क गए कि एक महिला परदे पर उनके थलाइवा का अपमान कैसे कर सकती है।

फिल्म रिलीज होने के बाद रम्या के चेन्नई वाले घर के बाहर फैंस ने भारी विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया..
हालात इतने बेकाबू हो गए थे कि रम्या को अपनी सुरक्षा के लिए कई दिनों तक अपने ही घर के अंदर रहना पड़ा था।
हालांकि, बाद में इसी रोल के लिए उन्हें Filmfare Best Actress और तमिलनाडु स्टेट अवॉर्ड मिला था।

साउथ में नाम कमाने के बाद रम्या ने हिंदी फिल्मों का रुख किया. और ये बात 90% लोग नहीं जानते होंगे कि रम्या कृष्णन का बॉलीवुड कनेक्शन कितना पुराना है।
वे केवल साउथ की स्टार नहीं थीं, बल्कि उन्होंने हिंदी बेल्ट में भी कई बड़े निर्देशकों के साथ काम किया है।

लोग अक्सर कहते हैं कि रम्या का बॉलीवुड डेब्यू परंपरा से हुआ था, लेकिन सच ये है कि वो पहली बार साल 1988 में आई फिरोज खान की कल्ट फिल्म दयावान में स्क्रीन पर दिखी थी।

इस फिल्म में उनका छोटा सा रोल था और उन पर एक गाना भी फिल्माया गया था..चाहे मेरी जान तू ले ले…
बतौर लीड एक्ट्रेस रम्या को बड़ा ब्रेक दिग्गज डायरेक्टर यश चोपड़ा ने अपनी फिल्म परंपरा में दिया था जिसमें वो विनोद खन्ना के साथ मुख्य भूमिका में नजर आईं।
इसी साल वह सुभाष घई की ब्लॉकबस्टर खलनायक में भी नज़र आईं थीं।

साल 1996 में फिल्म चाहत में उन्होंने शाहरुख खान के अपोजिट एक साइको और जुनूनी विलेन का रोल किया, जिसकी तारीफ खुद किंग खान ने की थी।
इसके बाद 1998 में आई कॉमेडी फिल्म बड़े मियां छोटे मियां में वह अमिताभ बच्चन की हीरोइन के रूप में नजर आईं।
हालांकि, साउथ में लगातार मिल रहे बड़े ऑफर्स और स्टारडम के कारण उन्होंने बाद में बॉलीवुड को ज्यादा समय नहीं दिया…

राजमाता शिवगामी देवी को जन्मदिन की शुभकामनाएँ..

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