फूल खिले हैं गुलशन गुलशन

आज के दौर में टीवी और यूट्यूब पर पॉडकास्ट में सेलिब्रिटी के इंटरव्यू देखना बहुत आम बात है.
लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत का सबसे पहला फ़िल्मी हस्तियों का टॉक शो कौन सा था?

आपको याद होगा दूरदर्शन पर ब्लैक एंड व्हाइट टीवी की स्क्रीन पर जब हफ्ते में एक बार बालों में एक असली फूल लगाए एक मुस्कुराता हुआ चेहरा आता था, जिसके साथ हमेशा कोई ना कोई फ़िल्मी सितारा होता था अपनी बात कहने के लिए..
याद आया..?

मैं बात कर रही हूँ मशहूर सेलिब्रिटी चैट शो फूल खिले हैं गुलशन गुलशन की जिसे अभिनेत्री तबस्सुम जी ने होस्ट किया था…
इस शो को दूरदर्शन पर साल 1972 से 1993 तक पूरे 21 सालों तक दिखाया गया.

इस शो का पहला एपिसोड दूरदर्शन मुंबई केंद्र की शुरुआत 2 अक्टूबर 1972 के ठीक एक हफ्ते बाद 8 अक्टूबर 1972 को प्रसारित हुआ था…
और इस ऐतिहासिक शो के सबसे पहले मेहमान महान संगीतकार नौशाद अली थे.
तबस्सुम जी ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि तबस्सुम जी बचपन से ही फिल्मों में काम करती थीं, इसलिए फिल्म इंडस्ट्री के सभी बड़े कलाकार उन्हें बहुत प्यार करते थे. और कोई भी उनके शो में आने से मना नहीं करता था.
नौशाद साहब के बाद राज कपूर, दिलीप कुमार और अमिताभ बच्चन जैसे बड़े-बड़े सितारे इस शो में मेहमान बनकर आए.

बहुत कम लोग जानते हैं कि जब इस टॉक शो की स्क्रिप्ट तैयार हुई, तो दूरदर्शन के अधिकारी इसका साधारण सा नाम गुलदस्ता रखना चाहते थे..
लेकिन तबस्सुम जी को यह नाम बहुत बोरिंग लगा. उन्होंने मशहूर गजल गायिका बेगम अख्तर की एक मशहूर गजल के शेर से प्रभावित होकर इस शो का नाम फूल खिले हैं गुलशन गुलशन रखने की जिद की. आखिरकार अधिकारियों को उनकी बात माननी पड़ी और यह नाम हमेशा-कैलेंडर के लिए अमर हो गया.

शो के नाम की तरह ही, तबस्सुम जी जब भी शो की रिकॉर्डिंग करती थीं, तो अपने बालों में हमेशा एक असली फूल लगाया करती थीं. उनकी यह अदा, उनकी खूबसूरत मुस्कान और उर्दू-हिंदी के शब्दों का बेहतरीन तालमेल हर दर्शक के दिल को छू जाता था.

तबस्सुम जी को शुरुआती दिनों में इस शो के हर एपिसोड के लिए सिर्फ़ 75 रुपये की फीस मिला करती थी, जो शो के बंद होने तक बढ़कर करीब 750 रुपये प्रति एपिसोड पहुँची थी.

एक बार अभिनेता मनोज कुमार को शो में आना था, लेकिन ऐन वक्त पर उनकी कमर में तेज दर्द हो गया और उन्होंने आने से मना कर दिया. शो ऑन-एयर होने में कुछ ही घंटे बचे थे और तबस्सुम जी बहुत परेशान हो गईं. उन्होंने कई कलाकारों को फोन किया, लेकिन सब बिजी थे. ऐसे में जब उन्होंने पहलवान और अभिनेता दारा सिंह को फोन किया, तो वो सब काम छोड़कर तुरंत स्टूडियो आ गए और शो की लाज बचा ली.

और जब मनोज कुमार अगली बार इस शो में आए, तो उन्होंने बताया कि उन्हें खुद मटन पकाना बहुत पसंद है. उन्होंने एक कमाल का सीक्रेट शेयर करते हुए कहा था कि मटन को एकदम मक्खन जैसा मुलायम बनाने के लिए, पकाते समय उसमें सुपारी का एक छोटा टुकड़ा डाल देना चाहिए.

यह शो अपने जमाने में इतना लोकप्रिय था कि एक बार जब सुपरस्टार राजेश खन्ना इस शो में आए थे, तो कहा जाता है कि मुंबई की सड़कों पर सन्नाटा पसर गया था. लोग अपने घरों में टीवी सेट के सामने बैठ गए थे.

1980 के दशक में बाद में जब भारत में रंगीन टीवी का चलन बढ़ा, तो यह शो विज्ञापनदाताओं का पसंदीदा शो बन गया था…इस शो के बीच में आने वाले कमर्शियल विज्ञापन बेहद महंगे और प्रतिष्ठित माने जाते थे…

क्या आपको याद है अपने बचपन के टीवी की यादें..ये शो

प्रीति सिंह, गाजियाबाद, उत्तरप्रदेश