
विधानसभा अध्यक्ष ने राजस्व मंत्री को लिखा पत्र
राजनांदगाँव/ गंडई पंडरिया। तहसील खैरागढ़ के ग्राम सोनपुरी में करीब 15 वर्षों से लंबित चकबंदी बंदोबस्त का मामला एक बार फिर चर्चा में है। चकबंदी के बाद भी भू-अभिलेखों में कास्त-कब्जे के अनुसार सुधार नहीं होने से ग्रामीण लंबे समय से राजस्व विभाग के विभिन्न दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। किसानों का कहना है कि उन्होंने आपसी सहमति से जमीनों की अदला-बदली कर खेती की सुविधा के अनुसार अलग-अलग स्थानों पर कब्जा लिया है और वर्षों से उसी भूमि पर खेती कर रहे हैं।
समस्या के समाधान के लिए पूर्व विधायक एवं संसदीय सचिव कोमल जंघेल के नेतृत्व में सोनपुरी के ग्रामीणों ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह से मुलाकात कर मामले की जानकारी दी। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा को पत्र लिखकर सोनपुरी के भूमिस्वामियों की समस्या के निराकरण के लिए पहल की है।
ग्रामीणों के अनुसार जमीनों के नाम परिवर्तन या नामांतरण के लिए रजिस्ट्री कराना पड़ सकता है, जिसमें किसानों को करोड़ों रुपये का खर्च उठाना पड़ेगा। आर्थिक रूप से कमजोर किसानों के लिए यह संभव नहीं है। ऐसे में किसानों ने चकबंदी के प्रावधानों के तहत बिना भारी रजिस्ट्री खर्च के भू-अभिलेख में सुधार की मांग की है।
पूर्व संसदीय सचिव कोमल जंघेल ने किसानों की समस्या को लेकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, राज्यपाल रामेन डेका, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा से मुलाकात कर शासन स्तर पर निर्णय लेने का आग्रह किया है। उन्होंने चकबंदी बंदोबस्त के लिए आवश्यक प्रावधान अथवा विधेयक लाने तथा मामले को कैबिनेट में प्रस्ताव के रूप में रखने की मांग की है।
छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 के अध्याय-16 में खातों की चकबंदी का प्रावधान है। धारा 205 में चकबंदी की परिभाषा तथा धारा 221 में नियम बनाने की शक्ति का उल्लेख है।
यदि शासन इस दिशा में निर्णय लेता है तो सोनपुरी के साथ प्रदेश के अन्य किसानों को भी इसका लाभ मिल सकता है। एकजुट होकर चकबंदी से किसान एक स्थान पर खेत विकसित कर मार्ग, बिजली, ट्यूबवेल और घेराबंदी जैसी सुविधाएं जुटाकर आधुनिक एवं व्यवस्थित खेती कर सकेंगे।


