गुस्से को मत दबाओ नहीं तो‎ वह फूट पड़ेगा

मुनि श्रेयांशप्रभ ने कहा- एससास को स्वीकार करो तो और भी बेहतर हो जाओगे
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‎राजनांदगांव 27 अगस्त। खरतर गच्छाधिपति मणिप्रभ सागर जी के सुशिष्य श्रेयांशप्रभ सागर जी ने आज यहां कहा कि अपने गुस्से को मत दबाओ नहीं तो वह दबते – दबते किसी दिन फूट पड़ेगा और इससे नुकसान फिर आपका ही होगा। उन्होंने कहा कि आपको बेहतर बनना है तो एहसास को स्वीकार करो।
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‎            जैन बगीचा स्थित ज्ञानवल्लभ उपाश्रय भवन में अपने नियमित चातुर्मासिक प्रवचन की श्रृंखला में श्रेयांशप्रभ मुनि ने  कहा कि दोष सभी में है। गुस्सा सभी को आता है किंतु किसी को क्षण भर के लिए आता है और किसी को लंबे समय के लिए आता है। हममें हजारों दोष हैं। हमारे इन दोषों को कोई दूसरा दूर नहीं कर सकता। हमें अपने दोष को दूर करने के लिए स्वयं ही प्रयास करना होगा। उन्होंने कहा कि पानी गर्म भी होता और ठंडा भी, किंतु गर्म पानी थोड़ी देर ही गर्म रहता है,उसके बाद वह ठंडा हो जाता है। जबकि ठंडा पानी स्थाई होता है। उन्होंने कहा कि हमारा परिवर्तन भी स्थाई होना चाहिए।
‎ मुनि श्री श्रेयांशप्रभ जी ने कहा कि हम प्रयास करते हैं किंतु हमारा मन शांत नहीं होता इसलिए हम असफल हो जाते हैं। जल्दबाजी में कुछ भी नहीं करना चाहिए। आप कहते हैं कि हमें अच्छा करना है, आप यह क्यों नहीं कहते कि हमें “और “अच्छा करना है। यह एक शब्द “और” जुड़ जाता है तो कुछ बेहतर करने का हममें आत्म विश्वास पैदा हो जाता है। उन्होंने कहा कि सभी दुर्गुण छोड़ना चाहते हैं किंतु दुर्गुण छोड़ना इतना आसान नहीं होता इसके पीछे का कारण यह है कि हमें जहां जाना है उसके बारे में हम सोचते हैं लेकिन हम जहां खड़े हैं हम उसके बारे में नहीं सोचते। हमें एहसास करना होगा और उसे स्वीकार करना होगा तभी हम बेहतर कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि हमें लगता है कि हम सीधे रास्ते पर जा रहे हैं जबकि सामने दिख रहा रस्ता टेढ़ा-मेढ़ा है । वास्तविकता यह है कि जो रास्ता सीधा दिखता है उसमें कई पेंच होते हैं जबकि टेड़ा -मेढ़ा रास्ता सिद्ध होता है।आप अहसास करना सीखेंगे तभी आप सही रास्ता चुन पाएंगे । यह जानकारी मीडिया प्रभारी विमल हाजरा ने दी।