पर्यावरण प्रेमी अभिनेता अतुल कुलकर्णी का है आज जन्मदिन

प्रीति सिंह, गाजियाबाद, उत्तरप्रदेश

अतुल कुलकर्णी भारतीय सिनेमा के सबसे संजीदा और बेहतरीन एक्टर हैं, रंग दे बसंती के लक्ष्मण पांडे हों या सिटी ऑफ ड्रीम्स के अमेय राव गायकवाड़, अतुल ने हर किरदार में जान डाल दी है।

पर्दे ओर ये ये गंभीर एक्टिंग करते हैं लेकिन असल जिंदगी में उतने ही सिद्धांतवादी है,

आज के इस डिजिटल दौर में जहां हम 15 मिनट भी फोन के बिना नहीं रह सकते, अतुल कुलकर्णी ने अपने करियर के पीक समय पर लगभग 15 साल तक मोबाइल फोन का इस्तेमाल ही नहीं किया।
उनका मानना था कि फोन इंसान की एकाग्रता को खत्म करता है और जब उनके पास फ़ोन नहीं होता तो वो अपने काम पर अच्छे से फोकस कर पाते थे..
उन्होंने खुद एक इंटरव्यू में बताया था कि सालों तक फिल्म इंडस्ट्री के बड़े-बड़े डायरेक्टर्स को उनसे संपर्क करने के लिए उनकी पत्नी गीतांजलि को फोन करना पड़ता था या उनके घर के लैंडलाइन पर कॉल करना पड़ता था।

उनका जन्म 10 सितम्बर 1965 को कर्नाटक के बेलगाम में हुआ था,

उन्होंने 10वीं के बाद इंजीनियरिंग में एडमिशन लिया था, लेकिन उनका मन नहीं लगा। तब उन्होंने पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी और बाद में बेलगाम से ही English Literature में ग्रेजुएशन पूरा किया।

अतुल ने अपना पहला नाटक तब किया था जब वे 24 साल के थे, इसके बाद उन्होंने अपना करियर एक्टिंग में ही बनाने का फैसला किया और 1992 में देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा दिल्ली में एडमिशन ले लिया।

NSD से पासआउट होने के बाद भी वो थिएटर में ही काम करते थे, एक बार जब वो अपने किसी कन्नड़ ड्रामा में परफॉर्म कर रहे थे तब एक कन्नड़ फिल्म निर्माता उनकी एक्टिंग से इतने प्रभावित हुए उन्होंने तुरंत उन्हें अपनी फिल्म भूमि गीता के लिए साइन कर लिया।
यही से उनके फिल्मी सफर की शुरुआत थी।

अतुल कुलकर्णी को बॉलीवुड में पहचान दिलाने वाली पहली फिल्म हे राम थी, जिसे दिग्गज अभिनेता कमल हासन डायरेक्ट कर रहे थे,

आपको जानकर हैरानी होगी कि कमल हासन जैसे दिग्गज डायरेक्टर की ये फ़िल्म अतुल को बिना किसी ऑडिशन के ही मिल गई थी.. इसके पीछे दो कारण थे..

पहला- उस समय अतुल कुलकर्णी का एक मराठी ड्रामा गांधी विरुद्ध गांधी बहुत ही लोकप्रिय हो रहा था और जिसमें उन्होंने महात्मा गांधी के बेटे हरीलाल गांधी का किरदार निभाया था जिसकी तारीफ़ कमल हासन ने भी सुनी थी..

दूसरा- हे राम फ़िल्म के मेकअप आर्टिस्ट अनिल पेमगिरिकर ने पहले अमोल पालेकर की फिल्म कैरी में अतुल के साथ काम किया था, उन्होंने कमल हासन से अतुल के काम की तारीफ़ की और उन्हें फ़िल्म में लेने का सुझाव दिया था..

इसके बाद कमल हासन ने अतुल को को चेन्नई बुलाया और उन्होंने बिना किसी लंबे ऑडिशन के, तुरंत ही उन्हें श्रीराम अभ्यंकर के लिए साइन कर लिया..
ये फिल्म उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुई, क्योंकि उन्हें अपनी इस पहली ही हिंदी फिल्म के लिए उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल अवार्ड मिला था।

बॉलीवुड में ऐसे एक्टर बहुत कम है जिन्हें लगातार दो साल तक नेशनल अवॉर्ड मिले हो, लेकिन अतुल कुलकर्णी ने ये कारनामा अपने करियर की शुरुआत में ही कर दिखाया था..
उन्हें साल 2000 में फिल्म हे राम और इसके अगले साल 2001 में चांदनी बार के लिए लगातार नेशनल अवॉर्ड अपने नाम किए थे।

अतुल कुलकर्णी एक बेहतरीन स्क्रीनप्ले राइटर भी हैं। आमिर खान स्टारर फिल्म लाल सिंह चड्ढा जो हॉलीवुड फिल्म फॉरेस्ट गंप की रीमेक थी, इसकी कहानी अतुल ने ही लिखी थी।
उन्होंने यह स्क्रिप्ट साल 2008 के आसपास ही लिख दी थी, लेकिन इसके राइट्स हासिल करने और आमिर खान को इसे बनाने के लिए तैयार करने में उन्हें पूरे 10 साल लग गए।

वे सिर्फ हिंदी या मराठी फ़िल्मों तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने हिंदी, मराठी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और इंग्लिश सहित 7 अलग-अलग भाषाओं के सिनेमा में एक्टिंग की है।

अतुल कुलकर्णी की निजी जिंदगी की बात करें तो वो अपनी ऑन-स्क्रीन भूमिकाओं की तरह ही अपनी असल जिंदगी में भी बेहद संजीदा, शांत और चकाचौंध से दूर रहने वाले इंसान हैं।

अतुल कुलकर्णी की पत्नी का नाम गीतांजलि कुलकर्णी है।
गीतांजलि भी भारतीय सिनेमा, ओटीटी और थिएटर जगत का एक बहुत बड़ा नाम हैं। उन्हें आप वेब सीरीज़ गुल्लक में शांती मिश्रा के मशहूर किरदार में देख चुके हैं।

दोनों की मुलाकात 1993 में NSD दिल्ली में पढ़ाई के दौरान हुई थी। दोनों एक ही बैच में थे और साथ ही काम करते थे, दोनों में प्यार हो गया।
करीब 3 साल तक एक-दूसरे को डेट करने के बाद, उन्होंने साल 1996 में बेहद सादगी से शादी कर ली।

शादी के बाद अतुल और गीतांजलि ने आपसी सहमति से जिंदगी में कभी बच्चे न पैदा करने का फैसला लिया था।
एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि वे दोनों अपनी शादीशुदा जिंदगी और अपने काम से बेहद खुश हैं, और उन्होंने शुरुआत में ही तय कर लिया था कि वे माता-पिता नहीं बनना चाहते। समाज की परवाह किए बिना दोनों अपने इस फैसले पर आज भी कायम हैं।

अतुल कुलकर्णी अपनी कॉलेज लाइफ और थिएटर के दिनों में बेहद अनुशासित रहे।
उन्होंने अपनी जिंदगी के 30 साल तक कभी शराब को हाथ भी नहीं लगाया था।

एक बार अपने दोस्तों के साथ उन्होंने सिर्फ यह जानने के लिए शराब चखी कि इसका स्वाद कैसा होता है।
उन्होंने एक पैग लिया, उन्हें उसका स्वाद बिल्कुल पसंद नहीं आया और उन्होंने उसी वक्त तय किया कि वे इसे दोबारा कभी नहीं छुएंगे।
तब से लेकर आज तक वे पूरी तरह से टीटोटलर यानि नशा न करने वाले हैं।

अतुल कुलकर्णी सिर्फ एक बेहतरीन कलाकार ही नहीं, बल्कि एक सच्चे पर्यावरण प्रेमी भी हैं।

उन्होंने महाराष्ट्र के सतारा जिले में करीब 24 एकड़ सूखी, बंजर जमीन खरीदी और किसी भी सरकारी फंड या किसी NGO की मदद लिए बिना, उन्होंने अपनी फिल्मों की कमाई का एक बड़ा हिस्सा इस जमीन को उपजाऊ बनाने में लगा दिया।

उनके इस प्रोजेक्ट का नाम Jaichi Wadi है, जो आज एक घना जंगल बन चुका है जहां हजारों पेड़ और कई तरह के जंगली पशु-पक्षी रहते हैं।

इतनी बड़ी पहचान होने के बावजूद वे चकाचौंध से दूर रहना पसंद करते हैं। वे एक शानदार वक्ता हैं और समाज, शिक्षा व पर्यावरण जैसे गंभीर मुद्दों पर बेहद बेबाकी से अपनी राय रखते हैं।

अतुल कुलकर्णी की जन्मदिन की शुभकामनाएँ

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